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ड्रैगन की चाल : चीन से मंगाई गयी इलेक्ट्रिक बसों को भारत में बेचने की तैयारी में नेपाल!

भारतीय अर्थव्यवस्था के खिलाफ साजिश या सोची समझी रणनीति?

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बिना बैंक गारंटी के चीन से बस मंगाई, टैक्स का बहाना बना भारत में किया होल्ड, अब बेचने की तैयारी

राजेश कुमार शर्मा की रिपोर्ट

अररिया (voice4bihar news)। इसे चीन की साजिश कहें या सोची समझी रणनीति, लेकिन हकीकत यह है कि नेपाल के लिए खरीद कर लायी गयी चाइनिज बसों को अब भारत में बेचने की तैयारी की जा रही है। इन सभी के बीच जहां नेपाल के लिए चीन से खरीद कर लाई गयी बसों को नेपाल ले जाने में असमर्थता जताई जा रही है। बसों को मंगाने वाली सुंदर यातायात प्राइवेट लिमिटेड ने इसके पीछे भंसार शुल्क को वजह बताया है। वहीं दूसरी ओर नेपाल सरकार के अर्थ मंत्रालय (Finance ministry) ने ही इसे भ्रामक बताया है।

18 चाइनिज बस भारत में बेचने की तैयारी

दरअसल, पिछले दिनों नेपाल के सुंदर यातायात प्राइवेट लिमिटेड ने नेपाल में सार्वजनिक यातायात के लिए चीन से 18 इलेक्ट्रिक बसें मंगाई थी, लेकिन भंसार शुल्क के भुगतान में असमर्थता जताते हुए उक्त 18 चाइनिज इलेक्ट्रिक बसों को नेपाल नहीं ले गयी। अब इन बसों को भारत के कर्सिस ग्रुप को बिक्री करने की सहमति होने की बात सुंदर यातायात के अध्यक्ष भेषबहादुर थापा ने कही है।

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भारत के अर्थतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश तो नहीं!

दूसरी ओर, नेपाल सरकार के अर्थ मंत्रालय (Finance ministry) ने यातायात कम्पनी के दावे को खारिज करते हुए इलेक्ट्रिक बस पर महज एक प्रतिशत भंसार शुल्क लगने की बात कही है। अर्थ मंत्रालय के प्रवक्ता रितेश कुमार शाक्य के अनुसार नेपाल के लिए मंगाई गयी इन बसों की कीमत का भुगतान नेपाल ने किया है। ऐसे में इन बसों को बीच रास्ते में नहीं बेचा जा सकता। यह कानून के विपरीत है।

इसके उलट यातायात कंपनी का दावा है कि पिछले 20 दिनों से 18 बसों को बीरगंज भंसार के भारत साइड में रोक कर रखा गया है। इन्हें नेपाल ले जाने के लिए प्रति बस 40 लाख का टैक्स लगेगा। इसलिए सौदा काफी महंगा साबित होने के कारण इन बसों को भारत में बेचने की सहमति बनी है।

नगद भुगतान के बिना खरीदी गयी हैं इलेक्ट्रिक बस, यही है आशंका की मूल वजह

नेपाल में किसी भी वाहन की विदेश से खरीद के लिए बकायदा एक नियम है। इसके लिए जरूरी है कि बैंक से पूर्व में एलसी खोल कर भुगतान किया जाए, लेकिन चाइनिज बस के खरीद में ऐसा नहीं हुआ। नियम के उलट यहां चीन की सोची समझी रणनीति नजर आ रही है। आशंका है कि भारतीय बाजार में बैक डोर से चिनिया हिस्सेदारी बढ़ाने के मकसद से 18 इलेक्ट्रिक बसों को बिना किसी बैंक गारंटी के ही चीन से ला दिया गया।

अब सुंदर यातायात प्राइवेट लिमिटेड ने इन्हें भारत की कर्सिस ग्रुप को बेचने की तैयारी की है। ऐसे में भारत की मोटर वाहन निर्माता कंपनियों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचाने की साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में कंसिपिरेसी थ्योरी को मानने वालों का तर्क है कि इन चाइनिज बसों के जरिये भारत में निगरानी की साजिश भी हो सकती है।

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