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बीच राजधानी में मंदिर की सीढ़ी पर पड़ी मिली पालकालीन भगवान कुबेर की प्रतिमा

भगवान कुबेर की करीब हजार साल पुरानी प्रतिमा अब बढ़ायेगी पटना म्यूजियम की शोभा

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पटना (voice4bihar desk)। गार्डिनर रोड अस्पताल के गेट के बगल में स्थित हनुमान मंदिर की सीढ़ी पर पड़ी भगवान कुबेर की करीब हजार साल पुरानी प्रतिमा अब पटना म्यूजियम की शोभा बढ़ायेगी। पुरातत्वविदों ने इसकी पहचान नौवीं-दशवीं शताब्दी के पालकालीन मूर्ति के रूप में की है। मंदिर के सेवक अदालतगंज निवासी संजय कुमार ने इस मूर्ति को खु्शी के साथ पटना म्यूजियम को सौंप दिया है।

गार्डिनर रोड अस्पताल के गेट के बगल में स्थित हनुमान मंदिर की सीढ़ी पर पड़ी इस मूर्ति पर सबसे पहले पटना संग्रहालय के संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. शंकर सुमन की नजर पड़ी। उन्होंने इस मूर्ति के संबंध में मंदिर के सेवक संजय कुमार से जानकारी ली गई। अदालतगंज निवासी संजय कुमार ने बताया कि यह मूर्ति तारामंडल के बगल में स्थित नीम के पेड़ के नीचे पड़ी हुई थी। इसे उठाकर उसने इस मंदिर के पास रखा है।

मंदिर की सीढ़ी पर प्राचीन मूर्ति पड़े होने की सूचना मिलने पर उसे देखने के लिए डा. शंकर सुमन के साथ बिहार संग्रहालय के क्यूरेटर डॉ. रणवीर सिंह राजपूत एवं डॉ. नंद गोपाल कुमार, पटना संग्रहालय के अपर निदेशक डॉ. विमल तिवारी के अलावा डॉ शिव कुमार मिश्र, सुनील कुमार, अभिषेक कुमार भी वहां पहुंचे।

जब सभी लोग आश्वस्त हो गये कि यह मूर्ति अति प्राचीन है तब निदेशक , संग्रहालय बिहार दीपक आनंद के निदेशानुसार मूर्ति संग्रहालय को प्रदान करने का उक्त सेवक संजय कुमार से आग्रह किया गया। सेवक ने मूर्ति को पटना संग्रहालय पहुंचाकर अपर निदेशक डॉ. तिवारी को सौंप दिया। इस मूर्ति का आकार 40x22x10 सेंटीमीटर है। इसका समय पालकाल अर्थात नवम दशम शताब्दी माना जा सकता है।

संग्रहालय बिहार के पूर्व निदेशक डॉ. उमेश चंद्र द्विवेदी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. जलज तिवारी एवं अन्य मूर्ति विशेषज्ञों ने भी इस मूर्ति को कुबेर ही माना तथा पालकालीन ही कहा है। इस मूर्ति की प्राप्ति के बाद संग्रहालय के अपर निदेशक डॉ. तिवारी ने संजय कुमार को धन्यवाद दिया।

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दरभंगा के मनीगाछी में भी हाल ही में मिली है प्राचीन मूर्ति

इसके पहले इस महीने की शुरुआत में दरभंगा जिले के मनीगाछी थानांतर्गत मकरंदा गांव में मिट्टी खुदाई के दौरान हरिहर की प्राचीन मूर्ति मिली थी। यह मूर्ति बारहवीं तेरहवीं सदी की है तथा ग्रेनाइट पत्थर की बनी हुई है। मूर्ति मिलने के बाद ग्रामीण पूजा पाठ, मंदिर निर्माण के लिए चंदा वसूली में लग गए हैं।

महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय के अध्यक्ष तथा पटना संग्रहालय के शोध एवं प्रकाशन प्रभागके प्रभारी डॉ शिव कुमार मिश्र ने कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर सचिव, पुरातत्व के निदेशक, दरभंगा के जिला पदाधिकारी एवं वरीय पुलिस अधीक्षक के अलावा मनीगाछी के थाना प्रभारी एवं अंचल अधिकारी से आग्रह किया है कि नियमानुसार इस मूर्ति को अविलंब संग्रहालय में रखवाने की व्यवस्था की जाए।

डॉ मिश्र ने ग्रामीणों एवं बुद्धिजीवियों से आग्रह किया था कि अग्नि पुराण में स्पष्ट किया गया है कि भग्न मूर्ति की पूजा नहीं की जानी चाहिए। इसलिए इसकी सुरक्षा एवं अनुसंधान के लिए तुरंत संग्रहालय में रखी जानी चाहिए। उत्तर बिहार में अनेक मूर्तियां हाल के दिनों में चोरी चली गईं हैं तथा इस क्षेत्र में तस्करी का खतरा बना रहता है। चोरी होने के बाद हम अपने धरोहर से हमेशा के लिए वंचित हो जाते हैं।

पुलिस मैनुअल में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि कहीं से भी अगर कोई पुरावशेष प्राप्त होती है तो नजदीक के सरकारी संग्रहालय में रखी जानी चाहिए। समाज एवं पुलिस पदाधिकारियों द्वारा इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है अन्यथा हमारे धरोहर धीरे धीरे गायब कर दिए जायेंगे।

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