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डॉ. रणजीत सिंह के लिए सोशल मीडिया पर पूरी रात चला कैंपेन

प्राथमिक शिक्षा निदेशक के तबादले से लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों में छायी निराशा

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पटना (voice4bihar desk)। मंगलवार की शाम जब बिहार में 94000 प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लाखों अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षा निदेशक डॉ. रणजीत कुमार सिंह के यू ट्यूब चैनल पर लाइव आने की प्रतीक्षा कर रहे थे तभी उनके तबादले की खबर आयी। इस खबर ने एक बारगी बिहार के 94000 प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के अभ्यर्थियों को हिला कर रख दिया।

कुछ ही घंटों में 1.74 से अधिक  लोगों ने डॉ. रणजीत सिंह की वापसी के लिए किया ट्वीट

मंगलवार शाम करीब सात बजे इस खबर के सामने आने के फौरन बाद सोशल मीडिया पर डॉ. रंजीत सिंह की वापसी के लिए शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ अन्य युवाओं ने अभियान छेड़ दिया। इसका अंजाम यह हुआ कि ट्वीटर हैंडल पर #We_Want_RanjitKrIAS_ComeBack को कुछ ही घंटों में 1.74 लाख से अधिक लोगों ने रीट्वीट कर दिया।

करीब 15000 शिक्षकों के पदों के लिए हो चुकी है काउंसिलिंग

बिहार में इन दिनों प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति की प्रकिया चल रही है। कुल 94000 में से करीब 15000 पदों के लिए काउंसिलिंग हो चुकी है। अगस्त माह में दो और फेज की काउंसिलिंग के जरिये शेष पदों को भरने की कवायद की जानी है। विभाग जहां इसकी तैयारी में लगा हुआ था वहीं अभ्यर्थी भी अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। 2017 में हुए टीईटी के बाद 2019 में शुरू हुई इस बहाली प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने में डॉ. रणजीत सिंह जी जान से लगे हुए थे। बहाली में पारदर्शिता को लेकर वे पूरी तरह सजग थे।

डॉ. रणजीत सिंह ने पूरी बहाली प्रक्रिया को बनाया पारदर्शी

बिहार में पिछले करीब 15 वर्षों में हुई प्राथमिक शिक्षकों की बहाली सवालों के घेरे में रही है। इनमें भ्रष्टाचार हावी रहा है। डॉ. रणजीत सिंह इस बार बहाली प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरी कर रहे थे। अभ्यर्थियों की हर शिकायत को खुद सुनना और उनका निराकरण करना डॉ. रणजीत सिंह की खासियत थी। काउंसिलिंग के दिन पूरे दिन नियंत्रण कक्ष में लाइव रहकर हजारों काउंसिलिंग सेंटर पर वे नजर रखते थे और वहां हो रही अभ्यर्थियों की समस्या का तत्काल निराकरण भी करते थे।

दुनिया में झूठे लोगों को बड़े हुनर आते हैं …..

कहा जाता है कि इससे उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गयी थी। इससे ब्यूरोकैट और सत्ता के गलियारे में उनके विरोधियों की संख्या भी काफी बढ़ गयी थी। डॉ. रणजीत सिंह ने मंगलवार को अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखा –दुनिया में झूठे लोगों को बड़े हुनर आते हैं ….. सच्चे लोग तो इलजाम से ही मर जाते हैं। माना जा रहा है कि अपने तबादले की भनक लगने के बाद इन शब्दों में उन्होंने अपने दिल की बात कह है।

गुजरात कैडर के आईएएस अफसर हैं डॉ. रणजीत सिंह

डॉ. रणजीत सिंह गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वैशाली जिले के देसरी प्रखंड के चकसिकंदर के मूल निवासी हैं। बिहार के लिए कुछ करने की तमन्ना लेकर प्रतिनियुक्ति में बिहार आये हैं। यहां यूपीएससी और बीपीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए वे MISSION 50  नामक संस्था से जुड़े। आज MISSION 50 के कई ऐसे छात्र हैं जो यूपीएससी और बीपीएससी की परीक्षा पास कर सरकारी सेवा में हैं। गुजरात में नर्मदा जिला को खुले में शौच मुक्त पहला जिला बनाने के बाद बिहार में सीतामढ़ी में जब उनकी पोस्टिंग बतौर जिलाधिकारी हुई तो उन्होंने सीतामढ़ी को भी बिहार का पहला खुले में शौच मुक्त जिला बना दिया।

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डॉ. रणजीत कुमार सिंह

अदालत में दम तोड़ रही बहाली प्रक्रिया को पहुंचाया मुकाम तक

करीब दो साल पहले जब डॉ. रणजीत सिंह को प्राथमिक शिक्षा निदेशक बनाया गया था तब तक बिहार में 94000 प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति का मामला काफी पेचीदा हो चुका था। मामला अदालत में पहुंच चुका था। अभ्यर्थियों के अनथक परिश्रम की वजह से आज बहाली प्रक्रिया अपने अंतिम मुकाम पर है। इसमे प्राथमिक शिक्षा निदेशक के रूप में डॉ. रणजीत सिंह के योगदान को याद कर आज अभ्यर्थी गमगीन हो जाते हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि डॉ. रणजीत सिंह बहाली प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ा रहे थे। पर भ्रष्ट तंत्र को यह रास नहीं आया और उन्हें हटा दिया गया। नये प्राथमिक शिक्षा निदेशक अगर सतर्क नहीं रहे तो नियोजन इकाई अपनी मनमानी करेगी और योग्य अभ्यर्थी इसका खामियाजा भुगतेंगे।

सोशल मीडिया पर उठे सरकार की मंशा पर सवाल

इस बीच डॉ. रणजीत सिंह के तबादले के खिलाफ कई ट्वीटर यूजर ने टिप्पणी की है। मनीषा कुमार ने लिखा – अच्छे और सच्चे लोगों को गिफ्ट में ट्रांसफर ही मिलता है। ऐसा वालीवुड की मूवी में देखे थे आज हकीकत में देख लिए। मनमोहन सिंह लिखते हैं – आज ऐसा लग रहा है जैसे शिक्षा विभाग की आत्मा को उसके शरीर से अलग किया जा रहा है। रितू लिखतीं हैं – ना घर चाहिए ना द्वार चाहिए, मुझे पुन: डॉ. रंजीत सर का पदभार चाहिए।

इमानदारी का बिहार में यही तोहफा मिलता है – ट्रांसफर

चंदा कुमारी लिखतीं हैं इमानदारी का बिहार में यही तोहफा मिलता है – ट्रांसफर। हमरी बहाली रंजीत सर से ही पूरी हो। जब तक बहाली पूरी नहीं हो रंजीत सर पद पर बने रहें। धीरज कुमार लिखते हैं घूसखोर और भ्रष्टाचारी सरकार ने रणजीत सर का ट्रांसफर कर बिहार की शिक्षा व्यवस्था का गला घोंट दिया।

चलो पटना, एक बार डंडा रंजीत सर के लिए भी खाया जाए

मुन्नी शुक्ला लिखतीं हैं – लाखों अभ्यर्थियों की बहाली को साफ सुथरे तरीके से कराने वाले इमानदार ऑफिसर का तबादला क्यूं किया गया गया, जवाब दीजिये नितीश कुमार जी, क्या भ्रस्ट तंत्र के माध्यम से बहाली को पूर्ण कराना है। पूछता है बेरोजगार स्टुडेंट्स। जवाब चाहिए। सुप्रिया पंडित लिखतीं हैं सभी पटना चलने की तैयारी करें। एक बार डंडा रंजीत सर के लिए भी खाया जाए। एक आंदोलन होना ही चाहिए उन्हें वापस लाने के लिए। सभी भाई-बहन एकजुट हों। अर्चना साह लिखतीं हैं – बीच बहाली मे रंजीत सर का ट्रांसफर करना नीतीश चाचा आपकी गलत मंशा को दर्शाता है। बहाली पूर्णतः पारदर्शी तरीके से हो रही है।रंजीत सर के ट्रांसफर को रोका जाए।

शिक्षक अभ्यर्थियों के मसीहा को वापस करो

प्रीति साव लिखतीं हैं – शिक्षक अभ्यर्थियों के मसीहा को वापस करो। रूपम विद्यार्थी लिखतीं हैं – जितनी तत्परता से रणजीत सर हम युवाओं और शिक्षक अभ्यर्थियों की समस्या और वर्तमान में चल रहे शिक्षक नियोजन में पारदर्शिता को मेन्टेन कर रहे थे शायद ही आज तक कोई पदाधिकारी किये होंगे। एक अन्य ट्वीट में लिखतीं हैं – इतना दुःख तो नियोजन पर स्टे लगने के समय भी नहीं हुआ था जितना आज हो रहा है रंजीत सर के ट्रांसफर से। उस समय विश्वास था कि रंजीत सर हमलोगों के साथ हैं, सब अच्छा होगा।

भाव्या लिखतीं हैं – शिक्षक बहाली के बीच कर्मठ और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का फ़ेरबदल आखिर कहां तक उचित है? बहाली पूर्ण होने तक उन्हें पद पर बने रहने दिया जाए। राजदीप सिंह लिखते हैं – हमें न्याय दो, बिहार में बदहाल शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए डॉ रंजीत कुमार सिंह IAS चाहिए शिक्षा विभाग में। शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक अभ्यार्थी के साथ अन्याय हुआ है। लाल बाबू साह लिखते हैं – थोड़ी भी गरिमा और नैतिकता की लाज है तो एक कर्मठ अधिकारी को शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने दीजिए। आप तो केवल सोशल इंजीनियरिंग और जातीय समीकरण में ही लगे रहते हैं। डॉ. रणजीत सिंह के समर्थन में यह अभियाद देर रात तक चलता रहा।

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