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टूट गयी लोजपा, चाचा और भाई समेत पांचो सांसदों ने चिराग से तोड़ा नाता

लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर की अलग सीटिंग अरेंजमेंट करने की मांग

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पटना (voice4bihar desk)। अभी पिछले हफ्ते जनशक्ति विकास पार्टी ने जमुई में जगह-जगह स्थानीय सांसद चिराग पासवान के लापता होने के पोस्टर लगाये थे। तब लोजपा ने इसे छुटभैये नेता का प्रचार पाने का स्टंट बताया था। आज चिराग के अपने चाचा और भाई ने उन्हें राजनीति से पूरी तरह आउट करने की चाल चल दी।

बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट का नारा देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दुश्मनी की राजनीति शुरू करने वाले चिराग पासवान की राजनीति शुरू होते ही खत्म होने के कगार पर पहुंच गयी है। राजनीति के सबसे बड़े मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले रामविलास पासवान के स्वर्ग सिधारते ही उनके भाई और भतीजा ने उनके बेटे को अनाथ छोड़ दिया।

खबर है कि लोजपा के पांच सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखकर सदन में बैठने के लिए लोजपा से अलग नयी व्यवस्था देने की मांग की है। अब तक चिराग सहित लोजपा के सभी छह सांसद लोजपा के लिए किये गये सीटिंग एरेंजमेंट के तहत बैठते थे। पर, अब वे सांसद चिराग से अलग होकर बैठना चाहते हैं। जिन पांच सांसदों ने नये सीटिंग अरेंजमेंट के लिए लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला को पत्र लिखा है उनमें चिराग के चाचा पशुपति नाथ पारस और चचेरे भाई प्रिंस के अलावा वीणा देवी, चंदन सिंह और महबूब अली कैशर शामिल हैं। इन पांचो सांसदों ने पारस को अपना नेता मान लिया है।

घटनाक्रम की टाइमिंग को लेकर इसे लोजपा के बागी गुट के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है। गत 30 मई को प्रधानमंत्री के कार्यकाल का कुल सात साल और वर्तमान का कार्यकाल का दूसरा साल पूरा हुआ है। पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा भी जोर-शोर से हो रही है। 2019 में जब केंद्रीय मंत्रिमंडल का गठन हुआ था तब लोजपा की ओर से रामविलास पासवान इसके हिस्सा थे। पर, पिछले साल पासवान के निधन के बाद से लोजपा मंत्रिमंडल से बाहर है।

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2020 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग ने जिस प्रकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत हमले किये वह लोजपा के भी वरीय नेताओं को रास नहीं आया। नीतीश तो इतने खफा हुए कि चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बार-बार कहना पड़ा कि लोजपा एनडीए का हिस्सा नहीं है।

लोजपा ने विधानसभा चुनाव में जदयू और भाजपा के खिलाफ कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। नतीजा हुआ कि लोजपा जहां एक मात्र सीट जीत पायी वहीं 25 से 30 सीटों को नुकसान जदयू और भाजपा को लोजपा द्वारा वोट काटे जाने के कारण हुआ। 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू तीसरे नंबर की पार्टी हो गयी और इसका कारण वह लोजपा को मानती है। इस चुनाव में बेगूसराय जिले के मटिहानी से राजकुमार सिंह लोजपा के टिकट पर जीतने वाले एक मात्र विधायक थे। इसी साल अप्रैल में उन्होंने भी जदयू का दामन थाम लिया था।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार लोजपा को तो माफ कर सकते हैं लेकिन वे चिराग को माफ करने के लिए तैयार नहीं हैं। विधानसभा चुनाव के बाद भी लोजपा की एनडीए में एंट्री को नीतीश कुमार ने ही रोके रखा। इधर रामविलास पासवान के निधन से मंत्रिमंडल में खाली हुई उनकी सीट को हर हाल में पाने के लिए लोजपा नेताओं में बेचैनी है।

जानकार बताते हैं कि बिना चिराग की लोजपा से नीतीश को कोई एतराज नहीं है। यही कारण है कि चिराग को छोड़कर उनकी पार्टी के बाकी सांसदों ने अलग गुट बना लिया है और लोकसभा में अपने लिए नये सीटिंग एरेंजमेंट की मांग कर दी है। इस नयी रणनीति से लोजपा के नये गुट को ने केवल एनडीए में एंट्री मिलेगी बल्कि उसे केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी जगह मिल जायेगी।

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