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धरी रह गयी सरकारी तैयारी, टूट गया कोसी का तटबंध

कोसी के रौद्र रूप से दर्जनों गांव में मची तबाही, हजारों परिवार हुए बेघर

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पटना/जोगबनी (voice4bihar desk)। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार  हो रही बारिश के चलते कोसी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप धारण किया तो सरकार की बाढ़ पूर्व तैयारी धरी की धरी रह गयी। कोसी में लगातार बढ़ रहे पानी के दवाब के बाद नेपाल से छोरे गए पानी के दवाब से  सुपौल जिला अंतर्गत सिकरहटा  में कोसी तटबंध टूटने से सुपौल व मधुबनी जिले के कई गांव जलमग्न हो गये हैं। कोसी नदी का तटबंध जहां टूटा है वह इलाका नेपाल सीमा से आठ किलोमीटर अंदर भारत में है।

नाव से इलाके का भ्रमण करते सुपौल के डीएम और एसपी।

बाढ़ से इन गांव में मची तबाही, डीएम-एसपी पहुंचे जायजा लेने

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कोसी का तटबंध टूटने से नदी के समीप के दिघिया, दुधेला, बेला, सेतोखर्ड सहित दर्जनों गांव जलमग्न हो गये हैं। इससे एक हजार से ज्यादा परिवार का घर डूब गया है। इन गांवों के हजारों लोगों ने किसी तरह बाढ़ में डूबे इलाकों से निकल कर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शरण ली है। इस बीच, सुपौल के जिला पदाधिकारी महेंद्र कुमार और जिला पुलिस कप्तान महेंद्र कुमार जानकारी मिलने के बाद पहुंचे और तटबंध टूटने से उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तटबंध की मरम्मत में लगे संवेदक को जल्द इसे दुरुस्त करने का निर्देश दिया। हालांकि पानी के भयंकर प्रवाह को देखते हुए अभी इसमें समय लगने की आशंका है।

कोसी का तटबंध टूटने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग बना बाढ़ पीड़ितों का ठिकाना।

कोसी बराज के कमजोर होने से पानी रोकना नुकसानदायक हो सकता है

इधर, कोसी तटबंध टूटने के बाद कोसी बराज से कम गेट को खोलकर पानी को बराज से न्यूनतम स्तर पर छोड़ने के प्रयास में कोसी परियोजना से जुड़े अधिकारी लगे हुए हैं। हालांकि बिशेषज्ञों की राय है कि पानी के ज्यादा बहाव के कारण जर्जर बराज को नुकसान पहुंच सकता है। शुक्रवार शाम तक 56 गेट में से 22 खोले गये थे। पानी को न्यूनतम स्तर पर छोड़ने की बात कोसी बराज कंट्रोल रूम ने कही है।

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