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गोलकीपर ऑटोग्राफ देता रहा और भारत खा गया गोल

ओलंपिक में हुआ ये रोचक वाकया, भारत 24-1 से जीता

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पटना (Voice4bihar desk)। 41 साल बाद टोक्यो आलंपिक में पदक देश के नाम करने के बाद गोल कीपर श्रीजेश को आपने गोल पोस्ट के ऊपर बैठकर जश्न मनाते देखा होगा। पर आप शायद ही जानते होंगे कि ओलंपिक में एक ऐसा वाकया भी हुआ है जब गोल कीपर गोल पोस्ट के पीछे अपने फैंस को ऑटोग्राफ देते रहे और भारतीय टीम गोल खा गयी। यह बात अलग है कि भारत ने उस मुकाबले को न केवल 24-1 के विशाल अंतर से जीता बल्कि ओलंपिक में उस बार हॉकी का गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया।

गोल करने के बाद खुशियां मनाते भारतीय खिलाड़ी।

1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में हुआ ये वाकया

यह वह दौर था जब भारतीय हॉकी टीम ओलंपिक में गोल्ड मेडल से कम कुछ जीतती ही नहीं थी। उस दौर में भारतीय हॉकी टीम का मतलब गोल्ड मेडल हुआ करता था। हम बात कर रहे हैं 1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की। लाल शाह बोखारी की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम इस ओलंपिक में भाग लेने गयी थी। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद और उनके बड़े भाई रूप सिंह भी टीम के हिस्सा थे। गोलकीपर रिचर्ड एलन थे। 1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत के अलावा जापान और अमेरिका की टीमों ने ही हिस्सा लिया था। भारत ने पहला मुकाबला जापान से 11-1 से जीता। अगले मैच में वह अमेरिका के खिलाफ उतरी। इस मैच को भारत ने 24-1 से जीता। इस मैच में इकलौता गोल अमेरिका की ओर से विलियम बोडिंगटन ने किया।

बताया जाता है कि अमेरिका के खिलाफ लगी गोलों की झड़ी से भारतीय टीम के गोलकीपर रिचर्ड एलन इतने निश्चिंत हो गये कि मैच के दौरान गोल पोस्ट के पीछे जाकर मैच देखने आये फैंस को ऑटोग्राफ देने लगे। अमेरिकी खिलाड़ी इस दौरान जब भारतीय रक्षा पंक्ति को भेदकर अंदर दाखिल हुए तो उन्हें खाली गोल पोस्ट मिला। अमेरिकी स्ट्राइकर विलियम बोडिंगटन ने इस मौके का फायदा उठाया और बिना गलती किये बॉल को सीधे गोल पोस्ट में डाल दिया। हालांकि अमेरिकी टीम को इसका कोई फायदा नहीं हुआ और जापान के बाद अमेरिका को हराकर भारतीय टीम ने ओलंपिक हॉकी के गोल्ड मेडल पर लगातार दूसरी बार कब्जा जमाया। इस टूर्नामेंट में ध्यानचंद ने 12 और रूप सिंह ने कुल 13 गोल दागे।

1928 से अब तक आठ बार ओलंपिक में गाेल्ड जीत चुकी है भारतीय टीम

ओलंपिक के हॉकी टूर्नामेंट में भारत अब तक आठ बार स्वर्ण पदक जीत चुका है। भारत ने अंतिम बार 1980 में रूस में खेले गये ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। उसके बाद कई ऐसे भी मौके आये जब भारतीय हॉकी टीम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई तक नहीं कर सकी। भारतीय हॉकी टीम ने 1928 में पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लिया था। नीदरलैंड को 3-0 से हराकर भारत ने पहली बार ओलंपिक का गोल्ड मेडल जीता था। पूरे टूर्नामेंट में भारत ने 29 गोल किये। इनमें अकेले ध्यानचंद ने 14 गोल किये। भारत के पहले ओलंपिक अभियान की खासियत यह भी रही कि उसके खिलाफ कोई भी टीम एक भी गोल नहीं कर सकी।

ध्यानचंद

1936 में ध्यानचंद ने बर्लिन में खेला था अपना आखिरी ओलंपिक

1936 में बर्लिन में खेले गये ओलंपिक में भी भारत ने गोल्ड मेडल जीता। फाइनल मुकाबले में उसने जर्मनी को 8-1 से हराया। ध्यानचंद का यह आखिरी ओलंपिक था। इसमें उन्होंने कुल 13 गोल दागे थे। इस तरह तीनों ओलंपिक को मिलाकर ध्यानचंद ने कुल 39 गोल किये। कहा जाता है कि बर्लिन में ध्यानचंद की हॉकी की जादूगरी देखकर जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने उन्हें खाने पर आमंत्रित किया और जर्मनी की हॉकी टीम की ओर से खेलने का ऑफर दिया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।

1948 में लंदन में इंग्लैंड को हराकर गोल्ड पर जमाया था कब्जा

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1948 में लंदन में आयोजित हुआ ओलंपिक भारत के लिए खास था। 1947 में देश की आजादी के बाद भारत की टीम लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने गयी थी। 12 अगस्त को ओलंपिक हॉकी का फाइनल मुकाबला इंग्लैंड के खिलाफ खेलना था। बंटवारे के बाद हुए इस आयोजन में भारतीय हॉकी टीम के पुर्नगठन में भी परेशानी थी। कई हॉकी खिलाड़ी बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गये थे। ऐसे में जब नयी टीम ओलंपिक में हिस्सा लेने पहुंची तो उससे उम्मीदें पहले के मुकाबले कम ही थीं। हालांकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 8-0, अर्जेंटीना को 9-1 और स्पेन को 2-0 से मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। सेमीफाइनल में उसने नीदरलैंड को 2-1 हराया। फाइनल में सामने आयी इंग्लैंड की टीम को 4-0 से हराकर गोल्ड पर कब्जा जमाया।

1952 में पाकिस्तान को हराकर पांचवीं बार जीता गोल्ड

1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में भारत ने नीदरलैंड को 6-1 से हराकर लगातार पांचवीं बार ओलंपिक के गोल्ड पर कब्जा जमाया। 1956 के मेलबर्न ओलंपिक के फाइनल में भारत का पहली बार पाकिस्तान से सामना हुआ। इस मैच की शुरुआत में भारत की ओर से रणधीर सिंह जेंटिल ने गोल दाग कर बढ़त दिला दी। इसके बाद पाकिस्तान ने बराबरी करने की कई बार कोशिश की पर उसकी टीम सफल नहीं हुई। अंतत: मुकाबला 1-0 पर खत्म हुआ और भारत को लगातार छठी बार ओलंपिक का गोल्ड मेडल मिला। हालांकि इस बार कम अंतर से मिली जीत से भारत की बादशाहत पर खतरा मंडराने लगा।

1960 में पाकिस्तान ने पहली बार रोका गोल्ड का रास्ता

1960 में रोम में होने वाले ओलंपिक के लिए पाकिस्तान ने जी तोड़ मेहनत की और भारत को पहली बार गोल्ड मेडल से वंचित होना पड़ा। भारत ने रोम ओलंपिक ग्रुप मुकाबले में डेनमार्क को 10-0, नीदरलैंड को 4-1 और न्यूजीलैंड को 3-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 1-0 और सेमीफाइनल में इंग्लैंड को भी इतने ही अंतर से हराकर फाइनल में पहुंची। फाइनल में भारत का मुकाबला पाकिस्तान से हुआ। भारत यह मुकाबला 1-0 से हार गया और उसे पहली बार सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

1964 के टोक्यो ओलंपिक में पाकिस्तान से लिया बदला

हालांकि भारत ने रोम में मिली हार का बदला 1964 में टोक्यो ओलंपिक में पाकिस्तान से ले लिया। भारत ने टूर्नामेंट में बेल्जियम को 2-0, हाँगकांग को 6-0, मलेशिया को 3-1, कनाडा को 3-0 और नीदरलैंड को 2-1 से शिकस्त दी। जर्मनी और स्पेन से मुकाबला 1-1 की बराबरी पर छूटा। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 3-1 से हराकर भारत फाइनल में पहुंचा। उधर, पाकिस्तान भी स्पेन को 3-0 से हराकर फाइनल में पहुंचा। फाइनल मुकाबले में पेनाल्टी स्ट्रोक को भारत ने गोल में बदलकर गोल्ड पर कब्जा जमा लिया। यह उसका ओलंपिक का सातवां गोल्ड था।

1968 में ऑस्ट्रेलिया से सेमीफाइनल में हारा

1968 में खेले गये मैक्सिको ओलंपिक में पहली बार भारत सेमीफाइल मुकाबला हार गया और उसे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। मैक्सिको ओलंपिक में भारत अपना पहला मुकाबला न्यूजीलैंड से 2-1 हार गया। हालांकि इसके बाद पश्चिम जर्मनी को 2-1, मैक्सिको को 8-0, स्पेन को 1-0, बेल्जियम को 2-1, जापान को 5-0 और पूर्वी जर्मनी को 1-0 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा। सेमीफाइनल में भारत ऑस्ट्रेलिया से 2-1 से हार गया और उसे पहली बार बिना फाइनल खेले ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। आज की तरह 1968 में भी भारत ने जर्मनी को हराकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

1976 में बिना पदक के लौट गयी भारतीय हॉकी टीम

1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भी भारत सेमीफाइनल में ही हारकर बाहर हो गया। इस बार भारत का मुकाबला पाकिस्तान से हुआ और पाकिस्तान ने उसे 2-0 से हराया। ब्रॉन्ज मेडल के लिए भारत ने नीदरलैंड को 2-1 से हराया। 1976 के मॉन्ट्रीयल ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम बिना किसी मेडल के वापस लौट गयी। हालांकि इस कमी को भारत ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक में पूरा किया और गोल्ड मेडल जीता।

1980 में मॉस्को ओलंपिक में तंजानिया को 18-0, क्यूबा का 13-0 और मेजबान सोवियत संघ को 4-2 से हराया। इस दौरान पोलैंड और स्पेन के साथ मुकाबला 2-2 की बराबरी पर छूटा। फाइनल मुकाबले में स्पेन को 4-3 से हराकर आठवीं बार और अब तक का अंतिम ओलंपिक गोल्ड मेडल भारत ने जीता। 1980 के बाद 41 साल के इंतजार के बाद इस बार टोक्यो ओलंपिक में भारत सेमीफानल तक पहुंचा। सेमीफाइनल में हारने वाली एक अन्य टीम जर्मनी को 5-4 से हराकर भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

 

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