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पीएमसीएच में सुबह से जारी है गैंगवार, अब तक तीन जख्मी

एंबुलेस परिचालन में वर्चस्व के लिए भिड़े दो गुट, पटना पुलिस बेबस

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पटना (voice4bihar desk)। कोरोना महामारी के बीच जहां आम से खास की जान ऑक्सीजन और दवाइयों के अभाव में जा रही है वहीं दो अपराधी गुटों में पीएमसीएच में एंबुलेंस परिचालन में वर्चस्व को लेकर गैंगवार जारी है। इस गैंगवार में अस्पताल परिसर में दो बार गोलीबारी की घटना मंगलवार को महज छह घंटे के अंदर हुई जिसमें दोनों ओर से एक-एक गुर्गे जख्मी हुए हैं जबकि एक तमाशबीन भी इस वारदात में जख्मी हो गयी है।

छह घंटे में दो बार गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजा पीएमसीएच

मंगलवार की दोपहर पीएमसीएच परिसर स्थित क्वार्टर में रहने वाले शोएब नामक युवक को अपराधियों ने गोली मार दी थी। इस मामले की पुलिस अभी जांच कर ही रही थी कि शाम होते-होते एक बार फिर पूरा पीएमसीएच परिसर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हथियारों से लैस तीन-चार बदमाश मंगलवार की शाम पीएमसीएच परिसर में आ धमके और ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे। इससे वहां भगदड़ मच गई।

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अपराधियों के निशाने पर आयुष नामक एंबुलेंस चालक था। उसे भी गोली लगी है। इस दौरान अपराधियों की गोली से ज्योति नाम की एक लड़की जख्मी हो गई। दोनों गंभीर रूप से जख्मी हैं। दोनों को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है। घायल लड़की ज्योति किसी मरीज के इलाज के क्रम में अस्पताल में आयी हुई थी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पीरबहोर थानेदार, डीएसपी और एसएसपी पहुंचे।

सूत्रों की मानें तो घटना के पीछे पीएमसीएच में एंबुलेंस चलाने को लेकर वर्चस्व की जंग जारी है। जिस शोएब को मंगलवार की दोपहर पीएमसीएच परिसर में गोली मारी गई उसी के प्रतिशोध में बदमाशों ने शाम को आयुष नामक एंबुलेंस चालक को निशाना बनाया। बताया जाता है कि शोएब बिकाऊ गुट का गुर्गा है। बिकाऊ की हत्या चार-पांच महीने पूर्व गुलबी घाट पर गोली मारकर कर दी गई थी। उसकी भी हत्या पीएमसीएच में एंबुलेंस चलवाने को लेकर वर्चस्व में कर दी गई थी। बिकाऊ शोएब का रिश्तेदार भी था।

माना जा रहा है शाम को पीएमसीएच में गोलीबारी करने वाले बदमाश बिकाऊ और शोएब गुट के थे। यही वजह है कि शोएब को गोली मारे जाने के चार-पांच घंटे के भीतर ही बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया। इसके बाद अपराधी आराम से फरार हो गए। पीएमसीच परिसर में टीओपी है साथ ही वहां निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं। अस्पताल परिसर में बात-बात पर मरीज और उनके परिजनों पर डंडे बरसाने और धकियाने वाले सुरक्षाकर्मी अपराधी गुटों की गोलीबारी के दौरान दुबके रहे।

बता दें कि महामारी के इस दौर में एंबुलेंस चालक मरीज से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। मरीज को एक अस्पताल पहुंचाने के एवज में आठ से दस हजार रुपये ले रहे हैं। एक अस्पताल में मरीज को जगह नहीं मिली और अगर तीन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े तो मरीज को 20 से 25 हजार रुपये तक देने पड़ रहे हैं। ऐसे में एंबुलेस के एजेंट की भी मोटी कमाई हो रही है। इसी कमाई के चक्कर में एजेंट आपस में भिड़ रहे हैं। यानी एक ओर जहां बीमार पड़ने पर ऑक्सीजन, दवा अथवा अस्पताल में बेड नहीं मिल रही है वहीं मरने के बाद श्मशान में भी लाइन लगानी पड़ रही है। ऐसे में समाज के कुछ गिद्ध तत्व हैं जो जिंदा रहते हुए तो नोचते ही हैं, मरने के बाद भी नहीं छोड़ते हैं।

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