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आरसीपी केंद्र में फिट हो गये, अब ललन क्या करेंगे

जदयू में बड़ा सवाल, क्या उपेंद्र कुशवाहा होंगे पार्टी के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष

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पटना (Voice4bihar desk)। लोजपा को दर्द देने के बाद जदयू इन दिनों खुद पीड़ा महसूस कर रहा है। जदयू को यह पीड़ा तबसे महसूस हो रही है जब उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने केंद्र में मंत्री पद संभाला है। कभी ब्यूरोक्रेट रहे आरसीपी को राजनीति में लाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज कल उनसे दुखी हैं। हालांकि नीतीश ने अपने दुख का इजहार अभी सार्वजनिक तौर पर नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र में मंत्री बनने के बाद उन्होंने आरसीपी को बधाई दी है। सब काम मीडिया को बता कर नहीं किया जाता है।

ललन सिंह के बयान से सामने आयी पार्टी की खींचतान

पार्टी कार्यकारिणी की बर्चुअल बैठक में नीतीश कुमार की मौजूदगी में आरसीपी ने यह कहकर कि केंद्र में उनके मंत्री बनने का फैसला पार्टी का था, इस मुद्दे पर उपजे विवाद को शांत करने की कोशिश की। दूसरी ओर, पार्टी के वरिष्ठ सांसद ललन सिंह का यह कहना कि जब नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो फैसलों की जानकारी सबको हुआ करती थी, पर अब नहीं होती है, पार्टी के अंदर चल रहे खींचतान को सामने लाती है।

अभी नहीं संभले तो पार्टी की और बुरी गत होगी

पिछले दिनों पार्टी टूटने के बाद जब लोजपा प्रमुख चिराग पासवान पटना आये थे तो उन्होंने कहा था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होने के बाद जदयू टूट जायेगा। हालांकि जानकार मानते हैं कि अभी जदयू टूटेगा नहीं पर पार्टी को अभी नहीं संभाला गया तो बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इसकी जितनी बुरी स्थिति हुई थी, आगे उससे और भी बुरी होने वाली है। केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होने के बाद इसकी झलक दिखने भी लगी है। पार्टी के बड़े नेता ललन सिंह हासिये पर चले गये दिखते हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद ललन सिंह के मुद्दे पर जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुआ था। इससे पार्टी में ललन सिंह के कद का पता चलता है। पर करीब सवा दो साल बाद वही जदयू बिना ललन सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गया। इस बीच पार्टी में बड़ा बदलाव हुआ है कि तब नीतीश कुमार इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और अब आरसीपी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

जदयू को है पूर्णकालिक अध्यक्ष की जरूरत

फिलहाल नीतीश कुमार के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि वे पार्टी के वरिष्ठ सांसद ललन सिंह को कहां एडजस्ट करें। ललन सिंह कभी जदयू के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। आरसीपी सिंह के केंद्र में मंत्री बनने के बाद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद खाली हो सकता है। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी जिस मुकाम पर खड़ी है वहां उसे पूर्णकालिक अध्यक्ष की जरूरत है। आरसीपी पार्टी को पूरा समय नहीं दे सकते हैं। उनकी व्यस्तता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंत्री बने दो हफ्ते गुजर गये हैं और उनके बिहार आये भी इतने ही दिन हो चुके हैं। अभी संसद के मॉनसून सत्र के दौरान वे बिहार आयेंगे इसकी भी उम्मीद कम ही है।

उपेंद्र कुशवाहा

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आरसीपी किससे होंगे रीप्लेस, उपेंद्र या ललन

ऐसे में बड़ा सवाल है कि आरसीपी को किससे रीप्लेस किया जा सकता है। जिन दो नामों पर पार्टी में चर्चा चल रही है उनमें एक नाम ललन सिंह और दूसरा उपेंद्र कुशवाहा का है। कुशवाहा ने बिना शर्त पूरी रालोसपा का जदयू में विलय किया है। इसके बाद भी नीतीश कुमार ने उन्हें बतौर रिटर्न गिफ्ट पार्टी के संसदीय दल का नेता बना दिया। पर अब लगता है कि उनके भाग्य में जदयू का इससे भी बड़ा पद राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लिखा है।

उमेश कुशवाहा

प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का क्या होगा

यहां गौर करने वाली बात है कि जब नीतीश ने आरसीपी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था तब उमेश कुशवाहा को पार्टी का बिहार का अध्यक्ष बनाया था। तब कहा गया था कि पार्टी में लव-कुश समीकरण के ख्याल से राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किये गये हैं। अब जब उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तो क्या उमेश कुशवाहा अपने पद पर कायम रहेंगे?

ललन सिंह

प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए तैयार होंगे ललन सिंह ?

बिहार की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाले लोगों की मानें तो ऐसी स्थिति में उमेश कुशवाहा को खुद की बली देनी पड़ेगी यानी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटना पड़ेगा। तो क्या प्रदेश अध्यक्ष की इस खाली कुर्सी पर ललन सिंह को बैठाया जायेगा ? इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। जानकारों का कहना है कि ललन सिंह एक दशक पूर्व इस पद पर रह चुके हैं। वे केंद्र और राज्य में मंत्री भी रह चुके हैं। इस हिसाब से वे उपेंद्र कुशवाहा के मातहत काम करने के लिए सहमत होंगे इसमें संदेह है। ऐसे में वे खुद के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग कर सकते हैं और उपेंद्र कुशवाहा को प्रदेश अध्यक्ष के पद से संतोष करना पड़ सकता है।

ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देंगे नीतीश ?

इसके साथ ही सवाल यह भी है कि ललन सिंह के अब तक के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए क्या नीतीश उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे। पूर्व में जब नीतीश और ललन की राहें जुदा हुईं थीं तब ललन सिंह ने नीतीश के पेट में कहां-कहां दांत है, ये जानने का दावा करते हुए उसका इलाज करने की बात भी कही थी। कहतें हैं कि नीतीश कुछ भी भूलते नहीं हैं। उनकी खासियत है कि वे हड़बड़ाते नहीं है और समय का इंतजार करते हैं। आरसीपी के केंद्र में बनने के बाद जो जख्म उन्हें लगा है उसके लिए भी वे सही समय का इंतजार करेंगे। सही समय आने पर आरसीपी से राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज लेकर अपने किसी चहेते के सिर पर सजा देंगे।

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